कमजोर तथा अलग-थलग पड़े समुदायों को विद्यालयों, सेवाओं तथा मंडियों से जोड़ने के लिए सड़कों का सुधार भारत में विकास की कुंजी हैं।
पूर्वी भारत में चंदनपुर में सामुदायिक अस्पताल पहले की तुलना में अधिक व्यस्त रहता है। अस्पताल आने वाले नए मरीजों को संभालने के लिए 16 बिस्तरों के इस अस्पताल का आकार दोगुना किया जा रहा है। अस्पताल में हर दिन 100 से ज्यादा मरीज आते हैं, जो पिछले वर्षों की संख्या से दोगुनी है।
अब इस अस्पताल में ज्यादा लोग पहुंच सकते हैं क्योंकि देहाती इलाके में दूर-दराज के गांवों की सड़कों में सुधार हो चुका है। सुरक्षित, पक्की सड़कों, जिनका उपयोग मौसम के सभी हालात में किया जा सकता है, का मतलब है कि पहले कभी जो लोग घर पर ही कष्ट झेलते थे, या रास्ते में दम तोड़ देते थे, अब आधुनिक चिकित्सा केन्द्र तक पहुंच सकते हैं।
केन्द्र में कार्यरत डॉक्टर प्रकाश चन्द महाते का कहना है कि गर्भवती महिलाएं अधिकाधिक संख्या में शिशु प्रसव के लिए अस्पताल आने को तरजीह देती हैं। इससे इस क्षेत्र में प्रसव काल में होने वाली माता और शिशु की मृत्युदर में 25 प्रतिशत तक की कमी आई है।
डॉक्टर प्रकाश के अनुसार, “स्वास्थ्यकर्मी आधुनिक सड़कों से पहुंचना संभव होने के कारण, कई ग्रामों में 100 प्रतिशत प्रतिरक्षण टीका दर हासिल कर सके हैं।”
वह आगे कहते हैं, “जिंदगियां बचाई जा रही हैं। अब ऐम्बुलैंस उन गांवों तक पहुंच सकती हैं जहां पहले कोई सड़क मौजूद नहीं थी।”
ये जिंदगियां एडीबी-सहायित ग्रामीण सड़क सेक्टर-।। निवेश कार्यक्रम के तहत बचाई जा रही हैं, जिसका लक्ष्य ग्रामीण क्षेत्र में सड़कों के सुधार हेतु भारत सरकार के राष्ट्रीय प्रयास में इसकी सहायता करना है।
"खराब सड़कें लोगों को और गरीब बनाती हैं. यह बड़ी सीधी सी बात है."
देहात क्षेत्र में विशेषकर घटिया सड़क प्रणाली के कारण बच्चों के लिए स्कूल जाना अधिक कठिन और किसानों के लिए अपनी उपज मंडी तक ले जाना महंगा होता है। खराब सड़कें लोगों को अन्य अनेक प्रकार से प्रतिकूल रूप से प्रभावित करती हैं।
“खराब सड़कें लोगों को और गरीब बनाती हैं। यह बड़ी सीधी सी बात है।” यह एडीबी में एक वरिष्ठ परिवहन विशेषज्ञ ली मिंग ताई का कहना है। “सड़कों की मरम्मत और निर्माण से ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों की जिंदगी पर जबर्दस्त प्रभाव पड़ता है।”
भारत में, हाल के वर्षों में ग्रामीण सड़क प्रणाली की उपेक्षा से अनेक ग्रामीण समुदाय भारत में शहरों को प्राप्त आर्थिक अवसरों से वंचित हुए हैं। अनेक उपनगरों में गरीबी है तथा युवा लोग नौकरियों की तलाश में बड़े नगरों की तरफ जाने के लिए मजबूर हो रहे हैं।
इसके जवाब में, परियोजना के तहत भारत में सबसे अधिक गरीब क्षेत्रों में कुछ सड़कों का सुधार किया गया है।
ली मिंग के कथनानुसार, “इस परियोजना का फोकस सामाजिक तथा आर्थिक सेवाओं हेतु पहुंच में सुधार के माध्यम से गरीबों की सहायता द्वारा सामाजिक रूप से समावेशी तथा लिंग-अनुक्रियाशील होना है।”
मंडियों हेतु बेहतर पहुंच
एडीबी-सहायित परियोजना से असम, ओडिशा (पूर्वतः उड़ीसा) तथा पश्चिम बंगाल में 1,503 समुदायों को आधुनिक सड़कें उपलब्ध कराने द्वारा लगभग 2 मिलियन लोगों को सहायता प्राप्त हुई है, जिनमें अधिकांश ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले गरीब लोग हैं। इस परियोजना के तहत लगभग 2,900 किलोमीटर पक्की ग्रामीण सड़कों का निर्माण अथवा समुन्नयन किया गया है।
सड़कों के सुधार से लोग, विशेषकर महिलाएं, नौकरी की तलाश के लिए, काम पर जाने तथा स्कूल, क्लीनिक और अस्पताल अधिक जल्दी और सुरक्षित पहुंचने में सक्षम हुए हैं। इससे किसान भी उच्च-मूल्य की फसलें पैदा करने के लिए प्रेरित हुए हैं तथा अपनी अपनी फसल, इसको ताजा और अच्छी हालत में रखते हुए ज्यादा जल्दी मंडी पहुंचाने में सक्षम हुए हैं।
परियोजना के फलस्वरूप, क्षेत्र के किसान लोग नई सड़कें बनने से पहले की तुलना में अधिक बार मंडी पहुंचे हैं। सरकारी कृषि विस्तार कर्मियों के कृषि समुदाय के दौरों में तीन गुना की वृद्धि हुई है, जिससे किसानों को बेहद जरूरी विशेषज्ञता सलाह और अन्य सहायता प्राप्त हुई है।
इस परियोजना से पहले, देवलापाडा ग्राम का 63 वर्षीय किसान शत्रुघन महापात्र अपनी गेहूं और दूसरी फसलें भारी वर्षा के दिनों में मंडी नहीं ले जा पाता था। घुटनों तक पानी में डूबी पुरानी सड़क पर चलने के लिए पुराने जमाने की बैलगाड़ी एकमात्र साधन हुआ करती थी।
परियोजना के हिस्से के तौर पर, उसके गांव के निकट एक ऊंची डामर रोड बनाई गई थी। शत्रुघन अब अपनी फसलें जल्दी और आसानी से मंडी पहुंचा सकता है, भले ही भारी वर्षा हो रही हो। इस प्रकार उसकी आय दोगुनी हो गई है।
“परिवार बहुत तंग हाल में था” वह नई सड़क बनने से पहले की जिंदगी याद करता है। “अब, हम बेहतर हालत में हैं तथा अपनी जरूरतें पूरी कर सकते हैं”।
किसान लोग इस सड़क सुधार परियोजना से व्यापक लाभ प्राप्त करने वाले अनेक समूहों में एक हैं। कई लोग, जो पहले देहाती क्षेत्र में कम दिहाड़ी की मजदूरी करने के लिए मजबूर थे, इन सड़कों का उपयोग कर अच्छी दिहाड़ी के काम की तलाश में अपने गांवों से बाहर निकलने लगे हैं।
परियोजना पूर्ण होने के बाद, क्षेत्र के लोगों द्वारा कार्यस्थल की यात्रादूरी में 10 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जबकि काम पर पहुंचने में लगने वाले समय में 60 प्रतिशत तक की कमी आई है।
सार्वजनिक परिवहन के उपयोग में वृद्धि से इस सकारात्मक प्रभाव की पुष्टि हुई है। सार्वजनिक बसों तथा टैक्सियों का उपयोग 50 प्रतिशत बढ़ा है, जबकि मिनीबस के फेरों में 150 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई है।
वर्द्धित नामांकन
खमार ग्राम में सरकारी प्राथमिक विद्यालय में, विद्यार्थियों को वर्षा ऋतु के दौरान अपनी कक्षा तक पहुंचने के लिए भारी बाधाओं का सामना करना पड़ता था। चूंकि गांव की सड़कें पानी में डूब जाती थीं, अतः स्कूल जाने के लिए नाव का सहारा लेना पड़ता था या कुछ बच्चे स्कूल जाना छोड़ देते थे।
अब चूंकि नई सड़क बन चुकी है, आसपास के गांवों के विद्यार्थी बरसात के दौरान भी पैदल चलकर, साईकिल पर या बस द्वारा स्कूल पहुंचने हेतु सक्षम हो गए हैं।
केशव चन्द्र प्रधान, स्कूल के 40 वर्षीय अध्यापक, बताते हैं, “सड़क बनने से पहले स्कूल में केवल 40 विद्यार्थी थे। अब हमारी उपस्थिति पंजिकाओं में 70 विद्यार्थियों के नाम दर्ज किए जा चुके हैं।”
सन 2009 में परियोजना पूर्ण होने के बाद भी स्कूल उपस्थिति में सुधार देखा गया था। पांचवीं कक्षा या अधिक पास करने वाले विद्यार्थियों की संख्या में 8 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई, जबकि कोई भी शिक्षा प्राप्त नहीं करने वाले बच्चों की संख्या में 4 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई।
मधुसूदन बिस्वाल और उनकी पत्नी भानुमति बिस्वाल के लिए बाढ़ भी एक समस्या थी, जो उसी गांव में छोटी सी किराने की दुकान चलाते थे। उन्हें अपनी दुकान में बिक्री के खाद्य पदार्थ और दूसरा सामान धूल से अटी पुरानी सड़क से साईकिल के जरिये लाना पड़ता था। इस कारण वे बहुत थोड़ी मात्रा में सामान ला पाते थे और सामान ढोने के लिए कई समय खपाऊ चक्कर लगाने पड़ते थे।
मधुसूदन का कहना है, “अब, वाहन हमारे गांव में पहुंच सकते हैं और हम सामान थोक में खरीद सकते हैं।”
भानुमति ने सहमति जताई कि सड़क बनने से उनके व्यवसाय पर बड़ा प्रभाव पड़ा है। “हम अब कहीं ज्यादा कमाई कर रहे हैं” उसने कहा।
गांव में महिला सामुदायिक संगठन की सचिव 45 वर्षीय पांचाई स्वेन ने बताया कि उनका समूह कशीदाकारी और खिलौने बनाकर धनोपार्जन करता है। इसके लिए उन्हें धागे और कच्चे माल की जरूरत होती है तथा अपना तैयार माल व खिलौने बेचने के लिए बाजार ले जाना पड़ता है।
इस क्षेत्र में सड़क सुधार से पहले मंडी के चक्कर बड़े मुश्किल भरे होते थे। आज, नई सड़क पर सरकारी बसें चल रही हैं जो गांव में रूकती हैं। वे लोग अब आसानी से मंडी पहुंच जाते हैं और इसके परिणामस्वरूप उनके समूह की आय भी दोगुनी से ज्यादा हो गई है।
उन्होंने कहा, “हम अपने बच्चों को शिक्षित करना चाहते हैं। “आय बढ़ने के साथ, हम अब अपने बच्चों को स्कूल भेज सकते हैं।”
कटिंग ऐज पर
एडीबी ने कटिंग-ऐज एप्रोच का उपयोग करते हुए सड़क निर्माण परियोजना की प्रभावोत्पादकता तथा प्रभाव का गहन मूल्यांकन किया, ताकि यह आकलन किया जा सके कि विकास संगठन अपना कार्य कितनी अच्छी तरह कर रहे थे।
इस अध्ययन में इस तथ्य पर ध्यान दिया गया कि सड़क से क्षेत्र के एक गांव के लोग, उसी अवधि में बिना सड़क वाले गांव की तुलना में, किस प्रकार लाभान्वित हुए। इस विश्लेषण से कोई संगठन यह समझ सकता है कि क्या परियोजना के कोई सकारात्मक परिणाम - जैसेकि स्कूल में उपस्थिति सुधार तथा आय वृद्धि - प्राप्त हुए हैं, अथवा कि क्या परियोजना के परिणामस्वरूप साधारणतः अर्थव्यवस्था में सुधार देखा गया है।
मध्य प्रदेश राज्य में निर्मित सड़कों पर संचालित अध्ययन में पाया गया कि जिन ग्रामों में नई सड़कें बनाई गई या समुन्नत की गईं उनमें, सड़क सुधार के तहत नहीं आने वाले ग्रामों के मुकाबले, विभिन्न प्रकार के सुधार देखे गए।
सर्वाधिक महत्वपूर्ण रूप से, गरीब परिवारों के प्रतिशत - गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन कर रहे परिवारों के अनुसार मापे गए - में परियोजना ग्रामों में 4.6 प्रतिशत की गिरावट आई जबकि अन्य ग्रामों में यह गिरावट 2.8 प्रतिशत थी।
परियोजना के तहत सड़कों के सुधार से ग्रामों में बस सेवा में 61 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई, जबकि अन्य ग्रामों में 23 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। बिना नई सड़कों वाले गांवों में प्राथमिक स्कूल से पढ़ाई छोड़ने वाली कन्याओं में 7.2 प्रतिशत की कमी आई जबकि नई सड़कों वाले गांवों में गिरावट की यह दर 9.7 प्रतिशत दर्ज की गई। परियोजना से लाभान्वित ग्रामों में अध्यापकों की उपस्थिति 5.5 प्रतिशत बढ़ी और अप्रभावित गांवों में 0.3 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। अध्ययन में यह भी पाया गया कि परिवहन के दौरान खराब होने वाली फसलों की मात्रा में नई सड़कों वाले ग्रामों में 9.7 प्रतिशत की गिरावट और सड़क विहीन ग्रामों में 2.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
विद्यार्थियों हेतु प्रेरणा
पाराखंडा ग्राम में स्थित औद्योगिक प्रशिक्षण केन्द्र में आसपास के गांवों के विद्यार्थी इलेक्ट्रीशियन, पाइप फिटर्स तथा रोजगार पाने की दृष्टि से महत्वपूर्ण अन्य ट्रेड्स का अध्ययन करने आते हैं।
पाराखंडा ग्राम से 4 किलोमीटर दूर गांव से साईकिल से आने वाली 19 वर्षीया छात्रा संध्या रानी जेना का कहना है, “मैं यहां अध्ययन कर रही हूं ताकि मैं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकूं और अपने परिवार की भी सहायता कर सकूं।” “निश्चित रूप से, इस सड़क के बनने से पड़ोसी गांवों के विद्यार्थी इस केन्द्र में भर्ती होने के लिए प्रेरित हुए हैं।”
इस स्कूल में अध्यापक 30 वर्षीय रंजन कुमार ने बताया कि इस क्षेत्र में नई सड़क बनने से स्कूल में प्रवेशार्थियों की संख्या में वृद्धि हुई है।
उन्होंने बताया कि, “दो वर्ष पहले, इस गांव तक पहुंचना बड़ा दुष्कर कार्य था। तब यहां कोई सड़क नहीं थी और इस केन्द्र में मात्र 20 विद्यार्थी थे। अब यहां लगभग 60 विद्यार्थी हैं। सड़कों में सुधार होने के कारण, दूर के गांवों से आने वाले विद्यार्थियों को अब स्कूल पहुंचने में लगने वाले समय में भी कमी आई है।”
स्कूल के दो विद्यार्थियों जितेन्द्र बिस्वाल और राकेश प्रधान ने कहा कि सड़क निर्माण के कारण हमारा और हमारे संबंधियों का स्कूल में पढ़ाई करना संभव हुआ है। राकेश का एक भाई अपनी पढ़ाई पूरी कर अच्छी नौकरी पा चुका है।
राकेश के अनुसार, “सड़क पहुंच में सुधार से हमें इस केन्द्र में नामांकन करने में निश्चित रूप से सहायता मिली है। मैं अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद कोई नौकरी हासिल कर परिवार की आय में योगदान देना चाहता हूं।”
जितेन्द्र की नजर में यह सड़क अध्ययन का मौका पाने के दिशा में एक महत्वपूर्ण कारक थी। “हमारा गांव अधिकांश समय तक बाढ़ से प्रभावित रहता है। गांव तक पहुंचने के लिए कच्चा मार्ग एकमात्र रास्ता था। सड़क बनने से हम दूसरे गांवों तथा कस्बों के साथ बेहतर ढंग से जुड़ गए हैं। इससे पड़ोसी गांवों के मुझ जैसे विद्यार्थियों को अध्ययन के लिए आने पर विचार करने हेतु मदद मिली है।”
यह आलेख मूल रूप से, एशिया और प्रशान्त में एडीबी की सफल परियोजनाओं पर प्रकाश डालने वाले प्रकाशन टुगेदर वी डिलीवर में प्रकाशित हुआ था जिसमें विकास के प्रभावों, सर्वश्रेष्ठ पद्धतियों और नवोन्मेष पर प्रकाश डाला गया था।





